ईरान के न्यायमंत्रालय ने मंगलवार को जारी बयान में भारतीय मुसलमानों के जनसंहार के बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्यों, अंतर्राष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संस्थाओं और लोकतंत्र का दम भरने वाले देशों की चुप्पी की ओर संकेत करते हुए कहा कि चरमपंथियों हिन्दुओं के अपराधों और निहत्थे मुसलमानों ही हृदय विदारक तसवीरें विशेषकर मुस्लिम बच्चों और महिलाओं को ज़िंदा जलाना, मानवाधिकारों के मापदंडों और मानवीय सिद्धांतों के पूर्ण रूप से विरुद्ध है।
ईरान के न्याय मंत्रालय ने इसी प्रकार इस बात की ओर संकेत करते हुए कि भारत का नागरिकता संशोधन क़ानून सीएए, लोकतंत्र, मानवाधिकार और भारतीय संविधान के विरुद्ध है, भारत सरकार से इस भेदभावपूर्ण क़ानून को समाप्त करने की मांग की हैै।
दूसरी ओर ईरान की विशेषज्ञ एसेंबली ने भी भारतीय मुसलमानों के जनसंहार, उनकी मस्जिदों और धार्मिक केन्द्रों को तबाह किए जाने की निंदा करते हुए भारतीय मुसलमानों के समर्थन के संबंध में केन्द्र सरकार से आवश्यक कार्यवाही की मांग की है।
ज्ञात रहे कि भारत सरकार ने 11 दिसंबर को नागरिकता संशोधन क़ानून पारित किया है। इस क़ानून के मुताबिक़ बंग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से 2015 से पहले भारत में शरण लेने वाले, भारतीय नागरिकता ले सकते हैं लेकिन यह क़ानून मुसलमानों को शामिल नहीं करता।
इस बीच चरमपंथी हिन्दुओं ने पूर्वोत्तरी दिल्ली में मुसलमानों के मुहल्लों पर हमला किया और उनके घरों, मस्जिदों और दुकानों को ध्वस्त कर दिया। मुसलमानों के मुहल्लों पर पेट्रोल बम मारे।
भारत सरकार के मुताबिक़, 23 फ़रवरी से शुरु हुयी हिंसा में, 50 लोग मारे गए और 300 से ज़्यादा घायल हुए।